मनीष कश्यप की जीवनी: मनीष कश्यप की जीवनी : गुदड़ी के लाल से चुनावी मैदान तक बिहार की मुखर आवाज़

भारत के अलग–अलग राज्यों में काम करने वाले बिहारी श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा करने वाले कुछ नामों में मनीष कश्यप भी शामिल हैं। एक साधारण परिवार में जन्मे मनीष कश्यप आज बिहार के युवाओं के बीच पहचाने जाने वाले व्यक्तियों में गिने जाते हैं।

मनीष कश्यप : संक्षिप्त परिचय

विवरणजानकारी
पूरा नामत्रिपुरारी कुमार तिवारी
प्रसिद्ध नाममनीष कश्यप
जन्म वर्ष1990–1991 (अनुमानित)
उम्र (2025)लगभग 34 वर्ष
जन्म स्थानडुमरी गांव, बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार
राष्ट्रीयताभारतीय
पेशासामाजिक कार्यकर्ता, यूट्यूबर, राजनीतिज्ञ
शिक्षासिविल इंजीनियरिंग
प्रसिद्धि का कारणभ्रष्टाचार के खिलाफ वीडियो और जनमुद्दे
यूट्यूब चैनलManish Kashyap – Son of Bihar
राजनीति में प्रवेश2023 के बाद
विधानसभा चुनाव2025 (चनपटिया)
चुनाव परिणामपराजय, लगभग 35,000 वोट
वैवाहिक स्थितिअविवाहित (2025 तक)

मनीष कश्यप का वास्तविक नाम त्रिपुरारी कुमार तिवारी है। उनकी उम्र को लेकर लंबे समय तक असमंजस रहा, लेकिन अब सार्वजनिक और चुनावी दस्तावेजों से स्थिति काफी स्पष्ट हो चुकी है।

  • BBC की रिपोर्ट (अगस्त 2023) के अनुसार उस समय उनकी उम्र लगभग 32 वर्ष थी
  • MyNeta.in (2025 बिहार चुनाव डेटा) में उनकी उम्र 34 वर्ष दर्ज है

इन तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि:

  • मनीष कश्यप का जन्म 1990 या 1991 के आसपास हुआ
  • 2025 में उनकी अनुमानित उम्र: लगभग 34 वर्ष

नोट: आधिकारिक जन्मतिथि सार्वजनिक नहीं होने के कारण उम्र को “अनुमानित” रूप में ही प्रस्तुत किया जाता है, जो मीडिया और मानकों के अनुरूप है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मनीष कश्यप का जन्म बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया प्रखंड स्थित डुमरी गांव में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत रहे, जिसके कारण मनीष का जन्म ननिहाल में हुआ।
जन्म के समय मनीष गंभीर रूप से बीमार थे। गांव चारों ओर से नदियों से घिरा था और नज़दीकी अस्पताल करीब 11 किलोमीटर दूर सुगौली में था, जहां नाव से पहुंचना पड़ता था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद नाना-नानी ने उनकी जान बचाई।

यही संघर्ष आगे चलकर मनीष के जीवन का स्थायी स्वभाव बन गया।

आस्था, संस्कार और निडर बचपन

उनके परिवार में पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक संस्कारों को महत्व दिया जाता है, जिसका उल्लेख वे कई बार अपने सार्वजनिक इंटरव्यू में कर चुके हैं।
उनकी मां का विश्वास, पूजा और संस्कार मनीष को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

बचपन में मनीष गोल-मटोल थे। स्कूल में कभी “मोटू” तो कभी “बुलेट” कहकर चिढ़ाया जाता था। इसी भावनात्मक दौर में एक दिन वह घर छोड़कर भाग गए।

घर से भागने का संघर्ष और आत्मनिर्भरता

आठवीं कक्षा में घर छोड़कर मनीष पूर्वोत्तर भारत पहुंच गए। वहां छोटे-मोटे काम किए, पेट भरा और संघर्ष सीखा।
इसके बाद ट्रक के सहारे दिल्ली होते हुए मुंबई पहुंचे। करीब 16 महीने बाद डरते-डरते घर लौटे।

यही समय था जिसने मनीष को मानसिक रूप से मजबूत बना दिया।

शिक्षा और इंजीनियर बनने का सपना

घर लौटने के बाद मनीष ने बिहार से ही 10वीं और 12वीं (विज्ञान) की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद वह पुणे गए, जहां से सिविल इंजीनियरिंग में फर्स्ट डिवीजन से डिग्री हासिल की। पुणे में उन्होंने लगभग 8 साल बिताए।

इसी दौरान एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, जब उन्होंने दोस्त के बीमार पिता के इलाज के लिए अपना एग्जाम छोड़ दिया। यह फैसला उनके मानवीय स्वभाव को दर्शाता है।

भ्रष्टाचार से टकराव और कैमरा उठाने का फैसला

बेतिया जिला परिवहन कार्यालय में जब उनसे ₹22,000 की रिश्वत मांगी गई, तब मनीष ने चुप रहने के बजाय कैमरा उठा लिया।
यहीं से जन्म हुआ Manish Kashyap – Son of Bihar नाम के यूट्यूब चैनल का।

यूट्यूब की शुरुआत

  • पहला वीडियो: 25 दिसंबर 2018
  • विषय: सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी
  • बाद में मुद्दे:
    • खराब सड़कें
    • सरकारी अस्पताल
    • ठेकेदारी भ्रष्टाचार
    • आम जनता की समस्याएं

उनकी भाषा शैली और प्रस्तुति के कारण उनके वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से देखे जाने लगे।

मनीष कश्यप की नेट वर्थ

एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था कि एक समय उनकी यूट्यूब से मासिक आय 10 लाख रुपये से अधिक थी।

राजनीति में सक्रिय होने और यूट्यूब से दूरी बनने के बाद उनकी आमदनी में काफी गिरावट आई है। मनीष कश्यप का कहना है कि राजनीतिक गतिविधियों और निजी खर्च पर चुनाव प्रचार करने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई।

उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी आय को लेकर यह दावा किया था। हालांकि, उनकी कुल संपत्ति या मासिक आय को लेकर कोई आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

आरोप, विवाद और विचारधारा

उनकी सार्वजनिक गतिविधियों के दौरान कुछ बयानों और वीडियो को लेकर विवाद भी सामने आए। इन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कई बार कहा कि वे किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने का समर्थन नहीं करते और अपनी बात को सामाजिक संदर्भ में रखते हैं।

2023 का सबसे कठिन दौर: जेल यात्रा

फरवरी 2023 में तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों पर हिंसा की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
इन खबरों को भ्रामक बताते हुए पुलिस ने कार्रवाई की और मनीष कश्यप पर अफवाह फैलाने का आरोप लगा।

राजनीति में कदम और 2024 का चक्रव्यूह

आज मनीष कश्यप सिर्फ यूट्यूबर नहीं, राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनका नाम बिहार की राजनीतिक चर्चाओं में शामिल होने लगा।


उनकी लोकप्रियता से:

  • पश्चिमी चंपारण में
  • स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में
  • राज्य स्तर पर राजनीतिक चर्चाओं में

यूट्यूब से राजनीति की ओर रुख

जेल से बाहर आने के बाद मनीष कश्यप ने सक्रिय पत्रकारिता से दूरी बनाते हुए पूरी तरह राजनीति की राह पकड़ ली।

  • पहले: भाजपा से जुड़े
  • बाद में मतभेद के चलते भाजपा छोड़ी
  • फिर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी से जुड़े

उनका कहना रहा:

“मेरी लड़ाई पार्टी से नहीं, सिस्टम से है।”

2025 बिहार विधानसभा चुनाव

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मनीष कश्यप ने:

  • सीट: चनपटिया
  • पार्टी: जनसुराज

परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा, लेकिन:

  • उन्हें लगभग 35,000 वोट मिले

Live Hindustan (14 नवंबर 2025) के अनुसार

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निष्कर्ष

मनीष कश्यप का सफर एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण है जिसने सोशल मीडिया, सामाजिक मुद्दों और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनका सार्वजनिक जीवन विभिन्न विचारों और प्रतिक्रियाओं का विषय रहा है।

स्रोत और पारदर्शिता नोट:
यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स, मीडिया स्रोतों और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित एक प्रोफाइल है…

डिस्क्लेमर:
इस लेख का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल, विचारधारा या व्यक्ति का समर्थन या विरोध नहीं है…

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Chandan Sah
Chandan Sah

हिंदी सावेरा के फाउंडर और बायोग्राफी कंटेंट राइटर हैं।
वे विभिन्न व्यक्तित्वों की जीवनियों को शोध करके सरल और सटीक रूप में आप लोगों तक पहुँचाते हैं।

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